आपकी रोज़ की Swiggy/Zomato आदत आपको गरीब बना रही है (और आपको पता भी नहीं)
zxcqwqwcasq2q2 | 2025-11-29 07:19:11 (59.*)

एक लम्बा, थका देने वाला दिन। ऑफिस से घर लौटे और खाना बनाने की हिम्मत बिलकुल नहीं है। ऐसे में सबसे आसान क्या लगता है? फ़ोन उठाना, Swiggy या Zomato खोलना और बस कुछ ही क्लिक्स में गरमागरम खाना दरवाज़े पर। है न कितनी आसान और आरामदायक ज़िंदगी!


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लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह "आराम" आपकी जेब पर कितना भारी पड़ रहा है?


हम में से ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि पैसा बर्बाद करने का मतलब है कोई महंगी घड़ी या फ़ोन खरीदना। लेकिन सच तो यह है कि असली चोर हमारी बड़ी खरीदारी नहीं, बल्कि ये छोटे-छोटे रोज़ के खर्चे होते हैं। और इन चोरों में सबसे बड़ा है - ऑनलाइन फ़ूड ऑर्डरिंग।


चलिए एक छोटा सा, लेकिन डरावना हिसाब लगाते हैं। मान लीजिए आप हफ्ते में 4-5 दिन बाहर से खाना मंगवाते हैं और हर ऑर्डर पर औसतन 300 से 400 रुपये खर्च करते हैं। यह महीने का लगभग 6,000 से 8,000 रुपये हुआ। और साल का? यह रकम 72,000 से लेकर लगभग 1 लाख रुपये तक पहुँच जाती है!


एक लाख रुपये! एक पल रुककर सोचिये कि आप इस पैसे से क्या-क्या कर सकते थे। एक शानदार Goa ट्रिप, एक नया लैपटॉप, या फिर इतनी बड़ी रकम की इन्वेस्टमेंट जो आपके भविष्य को सुरक्षित बना सकती थी। लेकिन यह सारा पैसा कहाँ गया? उन बर्गर और पिज़्ज़ा में, जो आपको शायद अब याद भी नहीं होंगे।


इस आदत की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह एक खर्च की तरह महसूस ही नहीं होती। यह तो बस एक आदत है, एक इनाम है जो हम खुद को थके हुए दिन के बाद देते हैं। 300-400 रुपये खर्च करते हुए किसी को अपराध बोध महसूस नहीं होता। और बस, यही इसका सबसे बड़ा जाल है।


तो इसका समाधान क्या है? नहीं, मैं यह बिलकुल नहीं कहूँगा कि आप बाहर से खाना मंगवाना पूरी तरह से बंद कर दें। यह एक सज़ा की तरह होगा, और सज़ा ज़्यादा दिन तक नहीं चलती।


इसका तरीका बहुत आसान है: जागरूक बनना। मैं आपको बस एक हफ्ते का चैलेंज देता हूँ। आप कुछ भी मत बदलिए, बस अपने हर छोटे-बड़े फ़ूड ऑर्डर का हिसाब एक जगह लिखिए। हफ्ते के अंत में जब आप उस टोटल को देखेंगे, तो आपकी आँखें खुली रह जाएँगी।


जब आपको इस खर्च के असर का एहसास हो जाएगा, तो आप खुद ही सही फैसला लेंगे। शायद आप हफ्ते में 5 दिन की जगह सिर्फ 2 दिन ऑर्डर करें। या शायद आप पहले से ही सोचकर रखें कि इस हफ्ते क्या बनाना है। यह छोटा सा बदलाव भी साल के अंत तक आपके हज़ारों रुपये बचा सकता है।


यह पैसे बचाने के लिए खुद को तकलीफ देना नहीं है, बल्कि स्मार्ट बनना है। आपको यह तय करना है कि आपके लिए क्या ज़्यादा ज़रूरी है - कुछ पल का आराम या आपके बड़े सपने? आज ही अपने फ़ूड ऐप्स की ऑर्डर हिस्ट्री चेक कीजिये, शायद आपके सपनों का रास्ता वहीं से होकर गुज़रता हो।

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